बलिया। कूटरचित दस्तावेज और फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल करने वाले सहायक अध्यापक जितेन्द्र राम के खिलाफ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) मनीष कुमार सिंह ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी सेवा समाप्त कर दी है। बीएसए ने नियुक्ति को नियुक्ति तिथि से ही शून्य मानते हुए तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है। साथ ही खंड शिक्षा अधिकारी, बांसडीह को विद्यालय का शासकीय अभिलेख एवं कार्यभार अपने कब्जे में लेने तथा संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
बीएसए ने वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा) को तत्काल प्रभाव से वेतन भुगतान रोकने और यदि अतिरिक्त वेतन का भुगतान हुआ हो तो उसकी वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। इस कार्रवाई से बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
मामला शिक्षा क्षेत्र बांसडीह के प्राथमिक विद्यालय रामपुर नौबरार का है। बीएसए के अनुसार रत्तोपुर निवासी त्रिभुवन नारायण सिंह ने जिलाधिकारी के जनसुनवाई कार्यक्रम में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि सहायक अध्यापक जितेन्द्र राम ने खरवार (अनुसूचित जनजाति) का फर्जी जाति प्रमाण-पत्र बनवाकर नौकरी प्राप्त की है, जबकि वह वास्तव में कमकर (पिछड़ा वर्ग) जाति से संबंधित है।
शिकायत के बाद बीएसए ने जाति प्रमाण-पत्र का सत्यापन तहसीलदार रसड़ा से कराया। जांच रिपोर्ट में जिला कास्ट स्क्रूटनी कमेटी द्वारा जितेन्द्र राम के भाई अरविन्द कमकर का खरवार जाति प्रमाण-पत्र पहले ही निरस्त किए जाने का उल्लेख किया गया। इससे स्पष्ट हो गया कि जितेन्द्र राम खरवार नहीं, बल्कि कमकर जाति से संबंधित हैं।
बीएसए ने आरोपी शिक्षक को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया, लेकिन प्रस्तुत स्पष्टीकरण तथ्यहीन पाया गया। जांच में यह साबित होने पर कि उन्होंने कूटरचना कर अनुसूचित जनजाति का फर्जी प्रमाण-पत्र लगाकर विभाग को गुमराह किया और नौकरी प्राप्त की, बीएसए ने उनकी नियुक्ति को प्रारंभ से ही अवैध घोषित करते हुए सेवा समाप्त कर दी।
बीएसए ने स्पष्ट किया कि पूरे प्रकरण में आवश्यक विधिक कार्रवाई भी कराई जाएगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।


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