बैंक राष्ट्रीयकरण पर बलिया में विचार गोष्ठी, चंद्रशेखर के योगदान को किया याद


57वीं वर्षगांठ पर वक्ताओं ने सार्वजनिक बैंकों को देश की आर्थिक मजबूती की आधारशिला बताया, निजीकरण के प्रयासों पर जताई चिंता

बलिया, 19 जुलाई। बैंक राष्ट्रीयकरण की 57वीं वर्षगांठ एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जन्मशती के अवसर पर उत्तर प्रदेश बैंक इम्प्लाइज यूनियन (UPBEU), बलिया इकाई द्वारा "बैंक राष्ट्रीयकरण एवं चंद्रशेखर की ऐतिहासिक भूमिका" विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बैंक राष्ट्रीयकरण के ऐतिहासिक महत्व, उसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वर्तमान भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के योगदान को याद करते हुए बैंक राष्ट्रीयकरण को देश के आर्थिक लोकतंत्र की मजबूत नींव बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉमरेड आलोक कुमार सिंह, अध्यक्ष, यूपीबीईयू बलिया इकाई ने की, जबकि संचालन वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता एवं इकाई के सचिव कॉमरेड के. एन. उपाध्याय ने किया।

मुख्य वक्ता कॉमरेड वी. के. सिंह, अध्यक्ष, एटक उत्तर प्रदेश ने अपने संबोधन में कहा कि बैंक राष्ट्रीयकरण समाजवादी विचारधारा, संसद के भीतर चंद्रशेखर जैसे दूरदर्शी नेताओं की प्रतिबद्धता और ऑल इंडिया बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन (AIBEA) के लंबे जनसंघर्ष का परिणाम था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य के रूप में चंद्रशेखर ने तत्कालीन उपप्रधानमंत्री मोरारजी देसाई सहित राष्ट्रीयकरण का विरोध करने वाली शक्तियों का वैचारिक रूप से प्रभावी मुकाबला किया। उन्होंने बताया कि 10 जुलाई 1969 को बेंगलुरु में आयोजित एआईसीसी अधिवेशन में बैंक राष्ट्रीयकरण के पक्ष में प्रस्ताव पारित कराने में चंद्रशेखर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर का स्पष्ट मानना था कि राजनीतिक स्वतंत्रता तभी सार्थक होगी जब देश की वित्तीय व्यवस्था पर राज्य का नियंत्रण हो और जनता की पूंजी का उपयोग निजी हितों के बजाय राष्ट्रीय विकास एवं जनकल्याण के लिए किया जाए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कॉमरेड रजनीश गुप्ता, संयुक्त सचिव, AIBEA ने कहा कि बैंक राष्ट्रीयकरण ने देश में आर्थिक लोकतंत्र को मजबूत किया तथा ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों, गरीबों, छोटे व्यापारियों और कमजोर वर्गों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के प्रयासों पर चिंता व्यक्त करते हुए कर्मचारियों से एकजुट रहने और बैंकिंग व्यवस्था की सार्वजनिक प्रकृति को सुरक्षित रखने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कॉमरेड के. के. रस्तोगी, महासचिव, सीबीएसए उत्तर प्रदेश ने कहा कि बैंक राष्ट्रीयकरण की उपलब्धियों को संरक्षित रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने संगठनात्मक एकता, कर्मचारी हितों की रक्षा तथा मजबूत सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था के लिए निरंतर संघर्ष की आवश्यकता पर बल दिया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में कॉमरेड आलोक कुमार सिंह ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक केवल वित्तीय संस्थान नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और देश की आर्थिक मजबूती के प्रमुख आधार हैं। उन्होंने कहा कि बैंक राष्ट्रीयकरण ने करोड़ों लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का कार्य किया और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

कार्यक्रम के अंत में कॉमरेड के. एन. उपाध्याय ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बैंक राष्ट्रीयकरण की विरासत की रक्षा करना केवल बैंक कर्मचारियों की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। इसके लिए कर्मचारियों को संगठित, जागरूक और संघर्षशील बने रहना होगा।

विचार गोष्ठी में बैंक कर्मचारियों, ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों एवं विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और बैंक राष्ट्रीयकरण की ऐतिहासिक उपलब्धियों तथा पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।



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