बलिया। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश तथा माननीय जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बलिया श्री अनिल कुमार झा के आदेशानुसार मंगलवार को वन स्टॉप सेंटर, बलिया में "भारत में महिलाओं के कानून" विषय पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बलिया के सचिव (पूर्णकालिक) श्री चन्द्र प्रकाश तिवारी ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री तिवारी ने उपस्थित महिलाओं को उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के तहत बेटियों को पिता की पैतृक संपत्ति में बेटों के समान अधिकार प्राप्त हैं। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 बाल विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है तथा दोषियों के लिए कठोर दंड का प्रावधान करता है। उन्होंने गर्भ का चिकित्सीय समापन (एमटीपी) अधिनियम, 1971 के तहत सुरक्षित एवं कानूनी परिस्थितियों में गर्भपात के अधिकार, पीसीपीएनडीटी अधिनियम, 1994 के तहत भ्रूण लिंग जांच पर प्रतिबंध तथा घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत महिलाओं को शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं आर्थिक शोषण से मिलने वाली कानूनी सुरक्षा के बारे में जानकारी दी। शिविर में दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के अंतर्गत बलात्कार, यौन उत्पीड़न, पीछा करना (स्टॉकिंग) एवं घरेलू क्रूरता के मामलों में सख्त दंड के प्रावधानों पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि महिलाओं को सामान्य परिस्थितियों में सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता तथा विशेष स्थिति में महिला मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होती है।
इसके अलावा अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956, सती प्रथा (रोकथाम) अधिनियम, 1987, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (पॉश) अधिनियम 2013, मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (संशोधित 2017) तथा समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 के प्रमुख प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। उन्होंने महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने तथा आवश्यकता पड़ने पर निःशुल्क विधिक सहायता का लाभ उठाने की अपील की।
कार्यक्रम में वन स्टॉप सेंटर एवं चाइल्ड लाइन के कर्मचारी, विधि के छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।


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