रामकथा के दूसरे दिन उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, हनुमान प्रसंग के माध्यम से बताया सच्ची भक्ति का रहस्य
विधायक केतकी सिंह ने की व्यासपीठ पूजा व आरती, नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव में जुट रहे हजारों श्रद्धालु
बेरूआरबारी/बलिया। भगवान दास मंदिर परिसर में बाबा अमरनाथ सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास राजन जी महाराज ने श्रीराम कथा का रसपान कराते हुए श्रद्धालुओं को सच्ची भक्ति का महत्व समझाया और कहा कि भगवान की भक्ति दिखावे का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उतारी जाने वाली साधना और समर्पण का मार्ग है।
कथावाचन के दौरान उन्होंने हनुमान जी के लंका आगमन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब पवनपुत्र हनुमान लंका पहुंचे तो वहां माता तुलसी का पौधा देखकर तुरंत समझ गए कि यह स्थान भगवान श्रीराम के किसी सच्चे भक्त का निवास है। उन्होंने कहा कि भक्ति जितनी विनम्रता और गोपनीयता के साथ की जाती है, उसका प्रभाव उतना ही व्यापक होता है। सच्चे भक्त की पहचान उसके आचरण, व्यवहार और जीवनशैली से स्वतः हो जाती है। इसलिए भक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि आत्मसात करना चाहिए। भक्त को छिपने में विश्वास रखना चाहिए, छपने में नहीं।
राजन जी महाराज ने कथा के दौरान रामचरितमानस की चौपाई—
"एक बार त्रेता जुग माहीं। शंभु गए कुम्भज ऋषि पाहीं॥
संग सती जग जननि भवानी। पूजे ऋषि अखिलेश्वर जानी॥"
का भावार्थ बताते हुए कहा कि त्रेता युग में भगवान शिव माता सती के साथ अगस्त्य मुनि के आश्रम पहुंचे थे। अगस्त्य मुनि ने भगवान शिव को समस्त सृष्टि का स्वामी मानकर उनकी पूजा-अर्चना की और उन्हें श्रीराम की पावन कथा सुनाई। यह प्रसंग भगवान शिव और श्रीराम के अद्भुत संबंध तथा भक्ति की महिमा को दर्शाता है।
कथा स्थल पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही। पूरा परिसर श्रीराम नाम के जयघोष और भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिया। श्रद्धालु कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करते रहे।
इस अवसर पर बांसडीह विधायक केतकी सिंह ने व्यासपीठ का पूजन-अर्चन एवं आरती कर कथा महोत्सव की सफलता और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम में राकेश सिंह, रजनीश सिंह, राणा कुणाल सिंह, प्रशांत सिंह, सतेन्द्र सिंह, मिथुन सिंह, लाखन सिंह, गामा सिंह, नागेंद्र बहादुर सिंह, गणेश सिंह, राजेश दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।




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