आस्था, सेवा और श्रद्धा का महापर्व : ज्येष्ठ माह का दूसरा बड़ा मंगलवार (बढ़वा मंगल)


सनातन परंपरा में ज्येष्ठ माह का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस माह में पड़ने वाले मंगलवार को विशेष रूप से भगवान हनुमान जी की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इनमें भी ज्येष्ठ माह का दूसरा बड़ा मंगलवार, जिसे लोकभाषा में “बढ़वा मंगल” कहा जाता है, श्रद्धा, सेवा, भक्ति और जनकल्याण का अनुपम पर्व बनकर सामने आता है। उत्तर प्रदेश विशेषकर अवध क्षेत्र, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और पूर्वांचल के अनेक जिलों में बढ़वा मंगल को अत्यंत धूमधाम, उत्साह और भक्ति भावना के साथ मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चन, सुंदरकांड पाठ, भंडारे और धार्मिक आयोजनों की भव्य छटा देखने को मिलती है।

बढ़वा मंगल का धार्मिक महत्व

बढ़वा मंगल को भगवान हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्ति का दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवारों पर हनुमान जी की पूजा करने से सभी प्रकार के संकट, भय, रोग और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। भक्तजन इस दिन व्रत रखकर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करते हैं। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई आराधना व्यक्ति को साहस, बल, बुद्धि और आत्मविश्वास प्रदान करती है।

सेवा और दान का महत्व

ज्येष्ठ माह वर्ष का सबसे गर्म समय माना जाता है। ऐसे में प्यासे और जरूरतमंद लोगों को पानी, शरबत, फल और भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। बढ़वा मंगल पर जगह-जगह भंडारे, प्याऊ और शीतल पेय वितरण की परंपरा इसी सेवा भावना का प्रतीक है। यह पर्व हमें मानव सेवा को ही सबसे बड़ा धर्म मानने की प्रेरणा देता है। समाज के हर वर्ग के लोग मिलकर सेवा कार्यों में भाग लेते हैं, जिससे सामाजिक एकता और भाईचारा मजबूत होता है।

सामाजिक समरसता का प्रतीक

बढ़वा मंगल केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और सामूहिक सहयोग का भी पर्व है। इस दिन जाति, वर्ग, धर्म और ऊंच-नीच के भेद मिटाकर सभी लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह भारतीय संस्कृति की “सर्वे भवन्तु सुखिनः” और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को साकार करता है।

संकटमोचन की आराधना का विशेष दिन

भगवान हनुमान को संकटमोचन कहा जाता है। मान्यता है कि बढ़वा मंगल पर उनकी विशेष पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख-शांति आती है। नौकरी, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए भी लोग इस दिन विशेष अनुष्ठान करते हैं।

नवाबी परंपरा और सांस्कृतिक महत्व

बढ़वा मंगल की परंपरा विशेष रूप से अवध क्षेत्र और लखनऊ में अत्यंत प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि नवाबी काल से ही यहां बड़े मंगल पर विशाल भंडारों और धार्मिक आयोजनों की शुरुआत हुई थी। समय के साथ यह आयोजन जनआस्था और सांस्कृतिक एकता का बड़ा उत्सव बन गया। आज भी लखनऊ सहित कई शहरों में इस दिन पूरा वातावरण “जय बजरंगबली” के जयकारों से गूंज उठता है।

पर्यावरण और लोककल्याण का संदेश

बढ़वा मंगल हमें केवल पूजा ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवों के प्रति दया, सहयोग और संरक्षण का संदेश भी देता है। गर्मी के मौसम में पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना, जरूरतमंदों की सहायता करना और समाज में प्रेम व सद्भाव फैलाना इस पर्व की विशेष प्रेरणा मानी जाती है।

ज्येष्ठ माह का दूसरा बड़ा मंगलवार (बढ़वा मंगल) वास्तव में भक्ति, सेवा, दान, सामाजिक एकता और मानवता का महापर्व है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची पूजा केवल मंदिरों में दीप जलाने से नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में खुशियां और राहत पहुंचाने से होती है। भगवान हनुमान की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, बल, बुद्धि और समृद्धि का संचार हो, यही इस पावन पर्व का संदेश है। 

जय श्री राम, जय 

परिवर्तन चक्र समाचार सेवा ✍️ 




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