राष्ट्रीय महिला दिवस : सशक्तिकरण, सम्मान और समानता की ओर बढ़ता भारत



हर वर्ष 13 फरवरी को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय महिला दिवस भारतीय समाज में महिलाओं के योगदान, संघर्ष और उपलब्धियों को सम्मान देने का विशेष अवसर है। यह दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि उस विचारधारा का प्रतीक है जो महिलाओं को समान अधिकार, आत्मसम्मान और अवसर प्रदान करने की प्रेरणा देता है। यह दिन हमें यह स्मरण कराता है कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका केवल सहायक नहीं, बल्कि निर्णायक रही है और आगे भी रहेगी।

भारत की सांस्कृतिक परंपरा में नारी को शक्ति, करुणा और सृजन का प्रतीक माना गया है। वैदिक काल से लेकर आधुनिक युग तक महिलाओं ने ज्ञान, नेतृत्व, कला, विज्ञान और समाज सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। राष्ट्रीय महिला दिवस का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह हमें उन महिलाओं के संघर्ष की कहानी याद दिलाता है जिन्होंने सामाजिक रूढ़ियों, भेदभाव और असमानता के बावजूद अपने आत्मबल से पहचान बनाई।

आज की भारतीय महिला शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, राजनीति, खेल, विज्ञान, पत्रकारिता, रक्षा और उद्यमिता जैसे हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। पंचायत से लेकर संसद तक, गांव से लेकर वैश्विक मंच तक, महिलाओं की सशक्त उपस्थिति देश की प्रगति की दिशा तय कर रही है। यह बदलाव केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सोच में आए सकारात्मक परिवर्तन का परिणाम है।

राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा पर भी चिंतन का अवसर प्रदान करता है। लैंगिक समानता, शिक्षा में समान अवसर, कार्यस्थल पर सम्मान, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षा—ये सभी मुद्दे आज भी निरंतर प्रयास की मांग करते हैं। सरकार और समाज द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न अभियान जैसे बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ, महिला स्वयं सहायता समूह, स्टार्टअप में महिला भागीदारी और डिजिटल सशक्तिकरण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

इस दिवस का एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी है कि महिला सशक्तिकरण केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जब परिवार, शिक्षा संस्थान और समाज मिलकर महिलाओं को समान अवसर और सम्मान देते हैं, तभी वास्तविक विकास संभव हो पाता है। पुरुष और महिलाएं एक-दूसरे के सहयोगी बनकर ही समतामूलक समाज का निर्माण कर सकते हैं।

राष्ट्रीय महिला दिवस हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि हमें केवल सफल महिलाओं की सराहना ही नहीं करनी चाहिए, बल्कि हर उस महिला का सम्मान करना चाहिए जो अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए निरंतर योगदान दे रही है। चाहे वह गृहिणी हो, किसान हो, श्रमिक हो या पेशेवर हर महिला राष्ट्र की आधारशिला है।

अंततः, राष्ट्रीय महिला दिवस एक संकल्प का दिन है समानता का संकल्प, सम्मान का संकल्प और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प। जब महिलाएं सशक्त होंगी, तभी समाज सशक्त होगा और तभी राष्ट्र सच्चे अर्थों में प्रगति की राह पर अग्रसर होगा।



पद्मदेव सिंह (पीडी सिंह)

चंद्रशेखर नगर, बलिया (उ.प्र)




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