बलिया। मटिही निवासी मिहिर सिंह ने हालिया BMC जैसे चुनावों और बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इन परिणामों ने देश की राजनीति को एक स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के सामने अब यह तय करने की निर्णायक घड़ी है कि वह केवल गठबंधनों के सहारे आगे बढ़ेगी या फिर अपनी स्वतंत्र पहचान और ज़मीनी मज़बूती के साथ राजनीति करेगी।
मिहिर सिंह ने कहा कि बिहार चुनाव के बाद AIMIM को मिली सीटों ने यह संकेत दिया है कि मुस्लिम मतदाता अब परंपरागत दलों से हटकर नए विकल्पों की ओर देख रहे हैं। “असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति को जो समर्थन मिल रहा है, उसका असर आने वाले समय में और स्पष्ट होगा। यदि यही रुझान बना रहा तो UP Election 2027 में इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा, जहाँ वोटों के बँटवारे का सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस और सपा को होगा, जबकि फ़ायदा बीजेपी को मिल सकता है,” उन्होंने कहा।
कांग्रेस के भीतर BSP से संभावित गठबंधन की चर्चाओं पर मिहिर सिंह ने कहा कि ज़मीनी हकीकत इन कयासों से अलग है। “BSP का वोट बैंक अब पहले की तरह ट्रांसफर नहीं हो रहा। केवल अंकगणित के भरोसे किया गया गठबंधन कांग्रेस के लिए लाभ से ज़्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है। विचारधारा, नेतृत्व और संगठन—तीनों स्तर पर यह मेल कमजोर दिखता है,” उन्होंने टिप्पणी की।
अपने बयान में मिहिर सिंह ने कांग्रेस को अकेले चुनाव लड़ने का साहसिक निर्णय लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “भले ही शुरुआती दौर में सीटों का नुकसान हो, लेकिन लंबे समय में इससे कांग्रेस को अपना संगठन मज़बूत करने, नए नेतृत्व को आगे लाने और जनता से सीधा संवाद स्थापित करने का अवसर मिलेगा। गठबंधन की राजनीति ने कांग्रेस की पहचान को धुंधला किया है, जिसे अब साफ़ करना ज़रूरी है।”
अंत में मिहिर सिंह ने कहा कि आज का मतदाता केवल डर या परंपरा के आधार पर वोट नहीं दे रहा। “वह विकल्प, नेतृत्व और स्पष्ट सोच देख रहा है। यदि कांग्रेस 2027 और आगे की राजनीति में प्रासंगिक बने रहना चाहती है, तो उसे बैसाखियों के सहारे नहीं, बल्कि अपने दम पर मैदान में उतरना होगा,” उन्होंने दो टूक कहा।


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