12 जनवरी, युवा दिवस पर विशेष :-
स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं के व्यक्तित्व के समग्र विकास हेतु विशेष उपादेय हैं। युवा वर्ग में अपार ऊर्जा शक्ति होती है।सम्भवत: इसीलिए स्वामी विवेकानंद जी का कहना था कि युवा वर्ग की ऊर्जा बहती नदी के समान होती है। जिस प्रकार बहती नदी को सही दिशा नहीं मिलने या प्रवाह मार्ग अवरूद्ध हो जाने पर धारा अवरूद्ध हो जाती है तथा नदी में बाढ़ या उबाल आ जाता है, ठीक उसी प्रकार यदि युवाओं में निहित ऊर्जा को सही एवं सकारात्मक दिशा में उपयोग नहीं किया गया वह ऊर्जा विनाशात्मक भी हो जाती है एवं युवा दिग्भ्रमित हो जाता है। इस सन्दर्भ में स्वामी विवेकानंद ने युवाओं के ऊर्जा को सही दिशा में लाने हेतु अपने विभिन्न व्याख्यानों में विभिन्न तरह के विचार व्यक्त किए ताकि युवा वर्ग उनके विचारों को आत्मसात कर अपने व्यक्तित्व का विकास कर अपनी ऊर्जा को समाज हित एवं देश हित में लगाकर देश को उन्नति के पथ पर अग्रसर कर सके।
स्वामी विवेकानंद जी का मत था कि आज का वर्ग, जिसमें देश का भविष्य निहित है और जिसमें जागरण के लक्षण परिलक्षित हो रहे हैं, ऐसे युवा वर्ग को अपने जीवन के लिए एक उद्देश्य की खोज कर लेनी चाहिए। किंतु इस युवा वर्ग को स्वयं में एवं हम सबको, खासतौर से परिवार एवं शिक्षक वर्ग को ऐसा प्रयास करना होगा कि युवा पीढ़ी के अन्दर जगी हुई प्रेरणा एवं उत्साह तथा उनके अन्दर निहित अथाह ऊर्जा सकारात्मक पथ पर संचालित हो सके। यदि ऐसा नहीं हुआ तो युवा वर्ग के शक्ति का ऐसा अपव्यय एवं दुरूपयोग होगा कि वह ऊर्जा शक्ति भलाई के स्थान पर बुराई के लिए तत्पर हो जायेगी। अत: युवा वर्ग की ऊर्जा को दिग्भ्रमित होने से बचाना होगा एवं उसे सकारात्मक पथ पर अग्रसर करना होगा।
युवाओं के लिए स्वामी विवेकानंद का मूल मंत्र था कि "उठो, जागो और तब तक मत रूको, जब तक तुम अपने लक्ष्य को प्राप्त न कर लो"। स्वामी जी का युवाओं से कहना था कि जब तुम खुद पर भरोसा नहीं कर सकते, तब तक भगवान पर भी भरोसा नहीं कर सकते। यदि हम भगवान को इंसान एवं खुद में देख पाने में सक्षम नहीं है तो हम उसे ढूढ़ने कहां जा सकते हैं।
स्वामी जी ने युवाओं को उत्साहित करते हुए कहा कि यह संसार कायरों के लिए नहीं है। आपका संघर्ष जितना बड़ा होगा, आप की जीत भी उसी के अनुरूप बड़ी होगी। जिस दिन आपके मार्ग में या आप के कार्य में समस्या ना आ जाए, उस दिन समझ लेना आप ग़लत रास्ते पर जा रहे हो। युवाओं के लिए राष्ट्र निर्माण में शिक्षा के महत्व को बताते हुए स्वामी जी ने कहा है कि युवाओं को सशक्त एवं सामर्थ्यवान बनाने हेतु शिक्षा एक मूलभूत साधन है। उनका मानना है कि युवा अपनी सोच की समस्या से बाहर निकलकर जो भी प्राप्त करना चाहते हैं, उसे प्राप्त हारने हेतु उचित दिशा में प्रयास करके उसे प्राप्त कर लेना चाहिए। स्वामी जी ने युवाओं के लिए कहाकि वह सब कुछ सीखना चाहिए जो दूसरों से बेहतर है, किंतु इसे अपनाएं अपने तरीके से एवं अपने अन्दर आत्मसात करें। दूसरों की तरह बनने का प्रयास न करें। आप स्वयं निर्मित हैं, आपके अंदर सब कुछ आपका है। इसके लिए उन्होंने युवाओं को अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानें हेतु प्रेरित किया। युवाओं के लिए स्वामी जी का कहना था कि आप जो भी सोचते हैं, वैसे ही हो जायेंगें। यदि आप सोचते हैं कि आप कमजोर हैं तो निश्चित आपमें कमजोरी आ जायेगी और यदि आप सोचते है कि आप शक्तिशाली हैं तो निश्चित ही आप शक्तिशाली बन जायेंगे।
युवाओं के प्रति स्वामी जी का यह भी मत था कि युवाओं को अपना लक्ष्य सबसे ऊंचा देखना चाहिए। यदि आप ऐसा करते हैं तो निश्चित ही आप सबसे ऊंचाई पर पहुंच जायेंगें। स्वामी जी ने युवाओं के लिए यह भी संदेश दिया है कि युवाओं को ही रंग, भेद एवं जाति के बेड़ियो को तोड़ना होगा, तभी समाज एवं राष्ट्र विकास के पथ पर अग्रसर होगा। युवा जब अपना नैतिक विकास, चारित्रिक विकास, शैक्षिक विकास, मानसिक विकास एवं शारीरिक विकास करेंगें तभी उनके व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास होगा और देश के समग्र विकास में युवक अपनी अहम् भूमिका निभा सकेंगें।
इस प्रकार स्पष्ट है कि स्वामी विवेकानंद जी युवा शक्ति के प्रतीक के रूप में खड़े हैं। युवा वर्ग के लिए स्वामी जी के विचार तब भी प्रेरणास्रोत एवं प्रासंगिक थे,आज भी हैं एवं भविष्य में भी रहेंगे। आज आवश्यकता है कि युवा वर्ग स्वामी विवेकानंद जी के बताए विचारों को आत्मसात कर समाज एवं राष्ट्र के सशक्त निर्माण में अपनी अहम् भूमिका निभाएं।


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