राष्ट्रीय बालिका दिवस : सशक्त भविष्य की आधारशिला
राष्ट्रीय बालिका दिवस समाज को यह याद दिलाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है कि किसी भी देश का भविष्य उसकी बेटियों के वर्तमान में सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त होने पर निर्भर करता है। यह दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और संकल्प का दिन है—कि हम बालिकाओं को समान अधिकार, सम्मान और अवसर देने के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में, जहाँ बेटियों ने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा सिद्ध की है, वहाँ उनका संरक्षण और सशक्तिकरण राष्ट्रीय जिम्मेदारी बन जाता है।
भारतीय समाज में लंबे समय तक बालिकाओं को भेदभाव, अशिक्षा और उपेक्षा का सामना करना पड़ा। भ्रूण हत्या, बाल विवाह, कुपोषण और शिक्षा से वंचित रखना जैसी सामाजिक कुरीतियाँ उनके विकास में बड़ी बाधा रहीं। इसके बावजूद समय के साथ सोच बदली और यह समझ बनी कि बालिका कोई बोझ नहीं, बल्कि परिवार और समाज की ताकत है। राष्ट्रीय बालिका दिवस इसी सकारात्मक बदलाव को गति देने का प्रतीक है।
शिक्षा बालिकाओं के सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम है। जब एक बालिका शिक्षित होती है, तो वह आत्मविश्वास के साथ अपने अधिकार पहचानती है और अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने में सक्षम बनती है। शिक्षित बालिका आगे चलकर शिक्षित माँ बनती है, जो पूरे परिवार को संस्कार, स्वास्थ्य और जागरूकता की दिशा में आगे बढ़ाती है। यही कारण है कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों ने देशव्यापी चेतना पैदा की है।
राष्ट्रीय बालिका दिवस यह भी रेखांकित करता है कि शिक्षा के साथ-साथ सुरक्षा और स्वास्थ्य भी उतने ही आवश्यक हैं। सुरक्षित वातावरण, पोषणयुक्त आहार और मानसिक संबल मिलने पर ही बालिकाएँ अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ सकती हैं। आज खेल, विज्ञान, कला, तकनीक और नेतृत्व के क्षेत्रों में बालिकाएँ नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं, जो यह प्रमाणित करता है कि अवसर मिलने पर वे किसी से कम नहीं।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह, छात्रवृत्ति योजनाएँ और कौशल विकास कार्यक्रम बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। डिजिटल युग में बालिकाएँ तकनीक के माध्यम से ज्ञान और अवसरों से जुड़कर अपने सपनों को नई उड़ान दे रही हैं। यह बदलाव केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक मजबूत कदम है।
राष्ट्रीय बालिका दिवस पर यह संकल्प लेना आवश्यक है कि हम हर बेटी को जीने, सीखने और आगे बढ़ने का समान अवसर देंगे। भेदभाव रहित, सुरक्षित और शिक्षित वातावरण ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव रखता है। जब हर बालिका निर्भय होकर अपने सपनों को साकार करेगी, तभी भारत का भविष्य वास्तव में उज्ज्वल और समृद्ध होगा।
परिवर्तन चक्र समाचार सेवा ✍️


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