अंतर्राष्ट्रीय परामर्श दिवस प्रतिवर्ष समाज में संवाद, समझ और सहयोग की महत्ता को रेखांकित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। यह दिवस इस बात की याद दिलाता है कि किसी भी समस्या का स्थायी समाधान केवल आदेश या दबाव से नहीं, बल्कि सार्थक परामर्श, विचार-विमर्श और सामूहिक निर्णय से ही संभव है। व्यक्तिगत जीवन से लेकर पारिवारिक, सामाजिक, शैक्षणिक, औद्योगिक और प्रशासनिक क्षेत्रों तक परामर्श की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आज के तेज़ रफ्तार और प्रतिस्पर्धात्मक युग में मानसिक तनाव, असमंजस और निर्णय संबंधी दुविधाएँ आम होती जा रही हैं। ऐसे में परामर्श व्यक्ति को अपनी समस्याओं को समझने, भावनाओं को व्यक्त करने और सही दिशा में निर्णय लेने में मदद करता है। अंतर्राष्ट्रीय परामर्श दिवस मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ यह संदेश देता है कि मदद माँगना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी का परिचायक है।
शैक्षणिक क्षेत्र में परामर्श छात्रों के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाता है। करियर काउंसलिंग से लेकर व्यक्तिगत समस्याओं तक, सही समय पर मिला मार्गदर्शन छात्रों को आत्मविश्वास प्रदान करता है और उन्हें अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर करता है। वहीं पारिवारिक परामर्श रिश्तों में आई दरारों को भरने, आपसी समझ को मजबूत करने और सौहार्द बनाए रखने में सहायक सिद्ध होता है।
कार्यस्थलों पर भी परामर्श की आवश्यकता दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, कार्य-दबाव, आपसी तालमेल और नेतृत्व कौशल के विकास में परामर्श एक प्रभावी साधन बन चुका है। कई संस्थान अब कर्मचारी सहायता कार्यक्रम (Employee Assistance Programs) के माध्यम से परामर्श सेवाएँ उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे कार्यक्षमता और उत्पादकता में भी वृद्धि हो रही है।
समाज के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें तो सामुदायिक परामर्श सामाजिक समस्याओं के समाधान में पुल का कार्य करता है। नशा मुक्ति, महिला सशक्तिकरण, किशोरावस्था की चुनौतियाँ, पारिवारिक हिंसा जैसे मुद्दों पर परामर्श समाज को संवेदनशील और सशक्त बनाने में योगदान देता है। परामर्श के माध्यम से न केवल समस्या का समाधान होता है, बल्कि व्यक्ति को स्वयं समाधान खोजने की क्षमता भी विकसित होती है।
अंतर्राष्ट्रीय परामर्श दिवस हमें यह भी सिखाता है कि सुनना एक कला है। जब कोई व्यक्ति बिना पूर्वाग्रह के, धैर्यपूर्वक और संवेदनशीलता के साथ सुनता है, तभी परामर्श सार्थक बनता है। आज आवश्यकता है कि हम अपने परिवार, मित्रों, सहकर्मियों और समाज के प्रति अधिक सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाएँ और संवाद को प्राथमिकता दें।
अंततः, अंतर्राष्ट्रीय परामर्श दिवस संवाद से समाधान की उस यात्रा का उत्सव है, जहाँ हर आवाज़ को महत्व मिलता है और हर समस्या का मानवीय समाधान खोजा जाता है। यह दिवस हमें प्रेरित करता है कि हम न केवल स्वयं परामर्श लें, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर दूसरों के लिए भी सहारा बनें, क्योंकि एक सही संवाद जीवन की दिशा बदल सकता है।
पूर्व अध्यक्ष, फौजदारी अधिवक्ता संघ, बलिया (उ.प्र.)



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