25 वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत हुआ भव्य भंडारा व कीर्तन, शिव मंदिर में जलाभिषेक को लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतार
चितबड़ागांव (बलिया)। थानाक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत नासिरपुर कलां में श्रावण मास की चौथी एवं अंतिम सोमवारी पर शिवभक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। करीब 25 वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत गांव में भव्य भंडारे एवं कीर्तन का आयोजन किया गया। इस दौरान नासिरपुर कलां समेत आसपास का पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव के जयघोष से गुंजायमान रहा। सुप्रसिद्ध शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन-पूजन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर
सोमवारी की सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। हाथों में गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, मंदार के पुष्प और पूजन सामग्री लेकर श्रद्धालु कतारबद्ध होकर मंदिर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक एवं पूजन-अर्चन कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की। पूरे क्षेत्र में ‘हर-हर महादेव’, ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘जय भोलेनाथ’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
टोंस नदी से जल लेकर पहुंचे कांवड़िए
टोंस नदी से पवित्र जल लेकर बड़ी संख्या में कांवड़िए एवं श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए सुबह से ही लंबी कतारें लगी रहीं। भीषण गर्मी और घंटों इंतजार के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था में कोई कमी नहीं दिखाई दी। बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी शिवभक्ति में लीन नजर आए।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस रही सतर्क
श्रावण की अंतिम सोमवारी के धार्मिक महत्व को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन व्यवस्था के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन, मंदिर सेवा समिति एवं ग्रामीण पूरी तरह मुस्तैद रहे। मंदिर परिसर और आसपास भीड़ को नियंत्रित करने तथा व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष सतर्कता बरती गई।
भव्य भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
शाम चार बजे से भव्य भंडारे का शुभारंभ हुआ। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया। कीर्तन और भंडारे में नासिरपुर कलां के ग्रामीणों के साथ ही आसपास के गांवों और क्षेत्र के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर सहभागिता की। भक्ति गीतों और भजनों से वातावरण देर तक शिवमय बना रहा।
ढाई दशक पुरानी परंपरा ने फिर रचा आस्था का माहौल
करीब ढाई दशक से चली आ रही यह परंपरा इस वर्ष भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई गई। आयोजन ने एक बार फिर नासिरपुर कलां को आस्था, सेवा और शिवभक्ति के रंग में रंग दिया। अंतिम सोमवारी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने क्षेत्र में भगवान भोलेनाथ के प्रति लोगों की गहरी आस्था और धार्मिक उत्साह को प्रदर्शित किया।






