अंतरराष्ट्रीय शांति एवं प्रेम दिवस विशेष : आइए, प्रेम, सद्भाव और आपसी सम्मान से दुनिया को और बेहतर बनाने का संकल्प लें।
दुनिया में विज्ञान, तकनीक और आर्थिक प्रगति ने जीवन को सुविधाजनक अवश्य बनाया है, लेकिन आज भी मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौती हिंसा, घृणा, युद्ध, असहिष्णुता और सामाजिक विभाजन की है। ऐसे समय में 7 जुलाई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय शांति एवं प्रेम दिवस हमें यह संदेश देता है कि यदि दुनिया को वास्तव में बेहतर बनाना है तो उसका मार्ग केवल शांति, प्रेम, करुणा और आपसी सम्मान से होकर ही जाता है।
शांति केवल युद्ध का अभाव नहीं, बल्कि मन, समाज और राष्ट्रों के बीच विश्वास, सहयोग और सौहार्द की भावना का नाम है। वहीं प्रेम वह शक्ति है जो जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र और सीमाओं से ऊपर उठकर इंसानों को एक-दूसरे से जोड़ती है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि तलवारें कभी स्थायी जीत नहीं दिला सकीं, लेकिन प्रेम और अहिंसा ने करोड़ों लोगों के दिल जीते हैं।
आज के दौर में परिवारों में बढ़ती दूरियाँ, समाज में तनाव, सोशल मीडिया पर कटुता और वैश्विक स्तर पर संघर्ष यह संकेत देते हैं कि हमें पहले से कहीं अधिक शांति और प्रेम की आवश्यकता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यवहार में विनम्रता, सहनशीलता और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव अपनाए, तो अनेक समस्याएँ स्वतः समाप्त हो सकती हैं। एक मधुर शब्द, एक मुस्कान, एक सहयोग और एक क्षमा का भाव भी समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
बच्चों को बचपन से ही नैतिक शिक्षा, सहिष्णुता, करुणा और मानवता के संस्कार दिए जाने चाहिए। विद्यालय, परिवार और समाज मिलकर ऐसी पीढ़ी तैयार करें जो मतभेदों का समाधान संवाद से करे, न कि विवाद से। शांति का अर्थ निष्क्रियता नहीं, बल्कि न्याय, समानता और मानव अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता भी है।
महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर पूरी दुनिया को यह सिखाया कि प्रेम और शांति सबसे प्रभावी हथियार हैं। उनका जीवन आज भी इस बात की प्रेरणा देता है कि किसी भी संघर्ष का समाधान हिंसा नहीं, बल्कि संवाद, धैर्य और सद्भाव में छिपा होता है।
अंतरराष्ट्रीय शांति एवं प्रेम दिवस केवल एक औपचारिक अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दिन है। यह हमें याद दिलाता है कि हम अपने परिवार, समाज, कार्यस्थल और देश में शांति और प्रेम का वातावरण बनाने के लिए स्वयं से शुरुआत करें। जब प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर प्रेम, दया और सम्मान की भावना विकसित करेगा, तभी विश्व में स्थायी शांति स्थापित हो सकेगी।
आइए, इस अंतरराष्ट्रीय शांति एवं प्रेम दिवस पर हम संकल्प लें कि घृणा नहीं, प्रेम फैलाएँगे; हिंसा नहीं, संवाद अपनाएँगे; और अपने व्यवहार से ऐसा समाज बनाएँगे जहाँ शांति सबसे बड़ी शक्ति और प्रेम सबसे बड़ी विजय बने।
पंडित विजेंद्र शर्मा ✍️जीरा बस्ती, बलिया



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