*नौरंगा में कटानरोधी कार्य की धीमी रफ्तार पर डीएम सख्त, युद्धस्तर पर काम के निर्देश*
*ग्रामीणों की शिकायत पर हरकत में प्रशासन, नौरंगा पहुंचकर डीएम ने जांची हकीकत*
*कटानरोधी कार्य के साथ आरोग्य मंदिर की भी जांच, गंदगी पर नाराज हुए डीएम*
*नौरंगा में कटानरोधी कार्य की धीमी रफ्तार पर डीएम सख्त, 500 मजदूर लगाकर समय से काम पूरा करने के निर्देश*
बलिया। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने शुक्रवार को बैरिया तहसील क्षेत्र के ग्राम नौरंगा में चल रहे बाढ़ नियंत्रण एवं कटानरोधी परियोजना का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्य की धीमी प्रगति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्यदायी संस्था को युद्धस्तर पर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी को बताया गया कि परियोजना की कुल लागत 2497.11 लाख रुपये है, जबकि कार्य की अनुबंधित लागत 1159.89 लाख रुपये है। निर्माण कार्य बाढ़ खंड बलिया द्वारा कराया जा रहा है। नौरंगा गांव में पूर्व में हुए कटान को रोकने के लिए 100 से 110 मीटर क्षेत्र में कटानरोधी कार्य कराया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने शिकायत की कि कार्य अपेक्षित गति से नहीं हो रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था को सुबह, शाम और देर रात तक कार्य कराने तथा अलग-अलग टीम बनाकर काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जियो बैग लगाने के लिए अलग टीम लगाई जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर पोकलैंड मशीन और मजदूरों की संख्या बढ़ाई जाए। उन्होंने प्रतिदिन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।
डीएम ने स्पष्ट कहा कि जियो बैग में केवल सिल्ट भरी जाए, रेत का उपयोग न किया जाए। साथ ही कार्यस्थल पर अधिकारियों की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए एक सहायक अभियंता (एई) और तीन अवर अभियंताओं (जेई) को नामित किया। उनके नाम और मोबाइल नंबर सूचना बोर्ड पर अंकित करने के निर्देश दिए गए। ठेकेदार का नाम और मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि नदी के निचले हिस्से को पहले सुरक्षित किया जाए और कटानरोधी कार्य को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए। निरीक्षण के दौरान ठेकेदार से मजदूरों की संख्या और कार्य प्रगति की जानकारी लेते हुए उन्होंने 400 से 500 श्रमिक लगाकर समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि रेड जोन में स्थित ऐसे मकान, जो पहले बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और कभी भी गिर सकते हैं, उन्हें खाली कराया जाए। उन्होंने बताया कि ऐसे प्रभावित परिवारों को मुआवजा और वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गांव स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर का भी निरीक्षण किया। परिसर में गंदगी पाए जाने पर उन्होंने नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने बताया कि यहां चिकित्सक नियमित रूप से नहीं आते हैं। इस पर जिलाधिकारी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए आरोग्य मंदिर की व्यवस्था बेहतर बनाने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि नौरंगा गांव की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और कटानरोधी कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।




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