किसी भी परिवार समाज और देश के विकास के लिए नारी का शिक्षित होना अति आवश्यक है। क्योंकि एक शिक्षित नारी ही अन्य सामाजिक बुराइयों से मुकाबला करने में सक्षम होती है। आज के बदलते परिवेश में मानव रूपी विकृत पशुओं की भी कमी नही है, जो अपनी विकृति का शिकार महिलाओं और लड़कियों बनाते है। यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा के परिणाम स्वरूप बहुत सी महिलाओं और छोटी बच्चियों की जो कि एक नाबालिग बच्ची ही क्यो न हो, हत्या कर दी जाती है। अगर लड़कियों को सशक्त बनाना है तो हमे सिर्फ किताबी ज्ञान और साक्षर बनाने से ही काम नही चलेगा, उन्हें शारीरिक रूप से भी सक्षम बनाना, आज की बहुत ही महत्वपूर्ण जरूरत है। बल्कि मैं तो ये कहूँगी की प्राइमरी कक्षाओं से ही बालिकाओं को ताइक्वांडो जुडो कराटे इत्यादि प्रशिक्षण अनिवार्य कर देना चाहिए जिससे बालिकाएं किसी भी आकस्मिक खतरों से अपनी आत्म रक्षा स्वयं करने में सक्षम हो। इसे अन्य शिक्षाओं के साथ जोड़कर अनिवार्य बना देना चाहिए। अगर हमारी बेटियां या नारी सशक्त और शिक्षित होंगी तो स्वालंबी बन अपनी और दुसरो की भी सुरक्षा कवच बनेगीं।
एक नारी अपने पूरे परिवार को एक सूत्र में जोड़ने की कड़ी होती है, अगर बेटी उच्च शिक्षित होती है तो बड़ी होकर यही बेटी एक अच्छी माँ, पत्नी की भूमिका में सफल होती है क्योंकि अपने पूरे परिवार को शिक्षा के प्रकाश से आलोकित करने की क्षमता रखती है। देश के विकास में स्वालंबी बन योगदान दे सकती है।
शिक्षा एक ऐसा हथियार है जो सारे बंधनो से इंसान को मुक्त करता है। अपने दिमाग मे जो भी अंधविश्वास, रूढिवादिता, लिंगभेद सबका समूल नाश करने में शिक्षा हमे सक्षम बनाता है। अतः नारी के सशक्तिकरण में शिक्षा एक महत्वपूर्ण योगदान होता है। समान शिक्षा हमारे भारतीय संविधान के मूलाधिकार के अंतर्गत भी आता है।
शशिलता पाण्डेय "सुभाषिनी" ✍️
बलिया (उत्तर प्रदेश)


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