महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व से परिपूर्ण पर्व है, जो भगवान शिव की आराधना को समर्पित है। यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है और शिवभक्तों के लिए विशेष साधना, उपवास और जागरण का अवसर प्रदान करता है। महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और जीवन में संतुलन स्थापित करने का संदेश देने वाला पर्व है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इसी दिन शिव ने समुद्र मंथन से निकले विष का पान कर संपूर्ण सृष्टि की रक्षा की थी, जिसके कारण उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए। एक अन्य मान्यता के अनुसार, इसी पावन रात्रि में भगवान शिव ने ज्योतिर्लिंग के रूप में स्वयं को प्रकट किया, जो उनके अनंत और निराकार स्वरूप का प्रतीक है। इन कथाओं के कारण महाशिवरात्रि का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।
इस दिन शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और मंत्रोच्चारण किए जाते हैं। श्रद्धालु प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं और दिनभर उपवास रखकर रात्रि जागरण करते हैं। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भस्म और फल अर्पित किए जाते हैं। ‘ॐ नमः शिवाय’ और महामृत्युंजय मंत्र का जाप वातावरण को भक्तिमय बना देता है। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक पक्ष अत्यंत गूढ़ है। यह रात्रि अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर और अस्थिरता से स्थिरता की ओर जाने का प्रतीक है। भगवान शिव को योग, तपस्या और वैराग्य का आदर्श माना जाता है। इस दिन साधक ध्यान और आत्मसंयम के माध्यम से अपने भीतर छिपी नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागने का संकल्प लेते हैं। शिव का अर्थ ही कल्याणकारी है, जो हमें जीवन में संतुलन, करुणा और त्याग का मार्ग दिखाता है।
सामाजिक दृष्टि से भी महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। यह पर्व हमें प्रकृति के संरक्षण, सादगी और सहअस्तित्व का संदेश देता है। शिव का वास कैलाश पर्वत पर माना गया है, जो प्रकृति के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। भांग, धतूरा और बेलपत्र जैसे प्राकृतिक तत्वों का प्रयोग हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखने की सीख देता है।
आज के आधुनिक और व्यस्त जीवन में महाशिवरात्रि हमें ठहरकर आत्ममंथन करने का अवसर देती है। यह पर्व सिखाता है कि जीवन में केवल भौतिक उपलब्धियाँ ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन भी आवश्यक है। शिव की आराधना हमें भय, अहंकार और द्वेष से मुक्त होकर सत्य और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
अतः महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और नवचेतना का उत्सव है। इस पावन अवसर पर भगवान शिव की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो, यही कामना है। हर हर महादेव!
*श्री शिवाय नमस्तुभ्यं*
अजय कुमार सिंह✍️



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