लखनऊ। तेज़ रफ्तार और भागदौड़ भरी जीवनशैली में किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) एक गंभीर और आम स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। किडनी स्टोन का दर्द असहनीय होता है और इसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में वर्तमान में 5 करोड़ से अधिक लोग पथरी की समस्या से प्रभावित हैं।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड सहित सैकड़ों पुस्तकों के लेखक एवं विश्व प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. भास्कर शर्मा ने बताया कि किडनी स्टोन को मेडिकल भाषा में रीनल कैलक्युली, यूरोलिथियासिस या नेफ्रोलिथियासिस कहा जाता है। पेशाब में मौजूद खनिज और साल्ट्स जब अधिक मात्रा में जमा होने लगते हैं तो गुर्दे में पथरी बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। समय पर उपचार न होने पर पथरी का आकार बढ़ सकता है और गंभीर दर्द का कारण बनता है।
उन्होंने बताया कि कई बार पथरी किडनी में ही रहती है और अधिक परेशानी नहीं देती, लेकिन जब यह यूरेटर (मूत्रवाहिनी) में फंस जाती है तो पेशाब का प्रवाह रुक जाता है, जिससे तेज दर्द होता है। यदि पथरी मूत्राशय तक पहुंच जाए तो यह पेशाब के साथ बाहर भी निकल सकती है। आंकड़ों के अनुसार लगभग 9 प्रतिशत लोग अपने जीवन में कम से कम एक बार पथरी की समस्या से जूझते हैं, और एक बार पथरी होने के बाद दोबारा होने की संभावना बनी रहती है।
डॉ. भास्कर शर्मा के अनुसार किडनी में होने वाली पथरी में 90 प्रतिशत मामले कैल्शियम ऑक्सलेट पथरी के होते हैं, जिसका मुख्य कारण गलत खान-पान और कम पानी पीना है। इसके अलावा कुछ लोगों में यूरिक एसिड, फॉस्फेट, स्ट्रुवाइट और सिस्टिन स्टोन भी पाए जाते हैं। अधिक प्रोटीन युक्त आहार, दूध और दुग्ध उत्पादों का अधिक सेवन, मूत्र पथ संक्रमण, मधुमेह, आनुवंशिक कारण और कुछ चयापचय संबंधी विकार भी पथरी के जोखिम को बढ़ाते हैं।
पथरी बनने के प्रमुख कारण
डॉ. शर्मा ने बताया कि कम पानी पीना, अधिक नमक, प्रोटीन और चीनी युक्त आहार, मोटापा, पारिवारिक इतिहास, सूजन आंत्र रोग, पहले पथरी होना, कुछ दवाओं का सेवन, पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज जैसी स्थितियाँ पथरी बनने की संभावना को बढ़ा देती हैं।
किडनी स्टोन के लक्षण
उन्होंने कहा कि छोटी पथरी बिना लक्षण के पेशाब के साथ निकल सकती है, लेकिन बड़ी पथरी में पेशाब करते समय दर्द, पेशाब में खून, बार-बार पेशाब आना, पीठ या पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द, बुखार, मतली और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
घरेलू उपाय और सावधानियां
डॉ. भास्कर शर्मा ने बताया कि घरेलू स्तर पर नींबू का रस, अनार का जूस, एप्पल साइडर विनेगर, गेहूं के ज्वार का जूस, राजमा का शोरबा, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और नमक का कम सेवन पथरी बनने से बचाव में सहायक हो सकता है। उन्होंने पालक, भिंडी, फ्रेंच फ्राइज, शकरकंद, बादाम जैसे ऑक्सलेट युक्त खाद्य पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी।
होम्योपैथिक उपचार
डॉ. शर्मा के अनुसार होम्योपैथिक पद्धति में हाइड्रेंजिया, परेरा ब्रावा, कैंथारिस, लाइकोपोडियम, सरसापैरिला, कैलकेरिया कार्ब जैसी औषधियां चिकित्सकीय परामर्श से उपयोगी हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर सावधानी, सही खान-पान और पर्याप्त पानी का सेवन किडनी स्टोन से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।


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