कल्याण सिंह जयंती : सुशासन, राष्ट्रभक्ति और जनसेवा के प्रतीक को नमन


भारतीय राजनीति के क्षितिज पर कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो अपने विचारों, निर्णयों और कर्मों से इतिहास की दिशा तय करते हैं। कल्याण सिंह जी ऐसे ही एक महान नेता थे, जिनकी जयंती पर आज पूरा देश उन्हें श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता के साथ स्मरण करता है। वे केवल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ही नहीं थे, बल्कि एक दृढ़ निश्चयी प्रशासक, प्रखर राष्ट्रवादी और जनभावनाओं से गहराई से जुड़े हुए नेता के रूप में सदैव याद किए जाएंगे।

कल्याण सिंह जी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ, किंतु उनकी सोच और कार्य असाधारण थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाने के लिए समर्पित कर दिया। उनका राजनीतिक जीवन सादगी, स्पष्टता और सिद्धांतों पर आधारित रहा। वे जो कहते थे, वही करते थे और जो सही समझते थे, उसी पर अडिग रहते थे। यही कारण है कि वे जनता के बीच “लौह पुरुष” के रूप में लोकप्रिय हुए।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कल्याण सिंह जी ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने, प्रशासन को पारदर्शी बनाने और गरीब-वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उन्होंने शासन को भयमुक्त और जवाबदेह बनाने का प्रयास किया। उनके कार्यकाल में आम आदमी को यह विश्वास मिला कि सरकार उसके साथ खड़ी है। सामाजिक न्याय, पिछड़ों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा उनके राजनीतिक चिंतन का अहम हिस्सा रही।

कल्याण सिंह जी का नाम भारतीय इतिहास में विशेष रूप से राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने उस समय भी संवैधानिक दायरे में रहते हुए जनभावनाओं का सम्मान किया, जब परिस्थितियाँ अत्यंत चुनौतीपूर्ण थीं। उनका स्पष्ट मत था कि राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और आस्था का सम्मान होना चाहिए। इसी दृढ़ता और साहस ने उन्हें करोड़ों लोगों के हृदय में स्थान दिलाया।

राजनीति के अतिरिक्त कल्याण सिंह जी एक संवेदनशील, सरल और अनुशासित व्यक्तित्व के धनी थे। सत्ता में रहते हुए भी उन्होंने सादगी को कभी नहीं छोड़ा। उनका जीवन युवाओं के लिए यह संदेश देता है कि राजनीति केवल पद और शक्ति का साधन नहीं, बल्कि सेवा, त्याग और राष्ट्रनिर्माण का माध्यम है।

कल्याण सिंह जयंती केवल एक महान नेता को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों को आत्मसात करने का अवसर भी है। आज आवश्यकता है कि हम उनके बताए सुशासन, राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और निर्भीक नेतृत्व के मार्ग पर चलें। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

आइए, इस पावन अवसर पर हम संकल्प लें कि हम स्वर्गीय कल्याण सिंह जी के विचारों और मूल्यों को अपने जीवन और समाज में उतारेंगे तथा एक मजबूत, समरस और सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।

डॉ. निर्भय नारायण सिंह, एडवोकेट✍️ 

पूर्व अध्यक्ष, फौजदारी अधिवक्ता संघ, बलिया (उ.प्र.)



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