खुशी क्या है? हर कोई खुश प्राप्त करना चाहता है पर मिलेगी कैसे? कहां छुपी रहती है। खुशी का सकारात्मक मनोविज्ञान पर अध्ययन करने से पता चला है कि खुश लोग अधिक रचनात्मक और उत्पादक हैं। वे अधिक पैसा कमाते हैं, एक सुखी वैवाहिक जीवन का आनंद लेते हैं, अच्छे पारिवारिक संबंध रखते हैं और अधिक दोस्तों को आकर्षित करते हैं। -वे स्वस्थ रहते हैं और अपने क्रोधी सहयोगियों को पछाड़ते हैं। जो लोग अच्छे स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा, अच्छे परिवार के समर्थन और मित्रों के साथ हैं, उनके पास नाखुश होने का कोई कारण नहीं है। फिर भी इन गुणों को रखने वाले कुछ लोग दुखी और परेशान रहते हैं। सुखी और शांतिपूर्ण जीवन के लिए कुछ उपचारात्मक उपाय हैं जैसे कि-
■ अपने समकक्षों जिन्हें, कम विशेषाधिकार प्राप्त हैं उनके साथ अपनी तुलना करके अपने आशीर्वाद की गणना करें और आप पाएंगे कि आप बहुत अधिक भाग्यशाली हैं। फिर खुश और संतुष्ट रहें।
■ उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त करें, जिन्होंने आपके होने में योगदान दिया है। ईश्वर, आपके माता-पिता, आपके शिक्षक, गुरु, आपका जीवन साथी और उन सभी लोगों के प्रति आभारी रहें जिन्होंने आपकी जरूरत में मदद की है।
■ वर्तमान में जियो। हालांकि, अतीत की सुखद घटनाओं को याद रखना चाहिए. लेकिन अतीत या बुरे सौदों के दर्दनाक अनुभवों के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए, लेकिन पिछली गलतियों से सीखें, यदि कोई हो। वर्तमान जीवन का उपहार है और इसीलिए इसे 'वर्तमान' कहा जाता है। इस वर्तमान को पूरी तरह से, खुशी से और उपयोगी तरीके से जिएं, न केवल अपने लिए बल्कि दूसरों के लिए भी।
■ अपने काम को खुशी से करें और बिना किसी इनाम या प्रशंसा की उम्मीद के अच्छे काम करें। यदि आपकी अपेक्षाओं के बिना यह पुरस्कार आपके पास आता है तो आपकी खुशी बहुत अधिक होगी।
■ जहां तक संभव हो दूसरों पर निर्भर न रहें। आत्मनिर्भर बनें और अपना कुछ काम खुद करें। आपको इसकी कीमत का एहसास तब होगा जब आप जिस पर निर्भर हैं उस समय मदद उपलब्ध नहीं होगी।
■ अपनी कमाई का कुछ हिस्सा दान पुण्य या किसी अच्छे कारण के लिए दें। अध्ययनों से पता चला है कि जो लोग अपनी आय का कुछ हिस्सा एक धर्मार्थ कारण के लिए उपयोग करते हैं, उनकी खुशी का हिस्सा उनके समकक्षों की तुलना में काफी अधिक है, जो अपनी सारी कमाई खुद पर खर्च करते हैं।
■ दूसरों की शांति में खलल न डालें, खासतौर पर तब जब वे छोटे हों या छोटे रुतबे के हों। आदतन आलोचना न करें। उनके अच्छे गुणों पर ध्यान देने की कोशिश करें और प्रशंसा की आदत विकसित करें।
■ तुच्छ मामलों में आपा न खोएं। नजरअंदाज करने की कोशिश करें। मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जो तार्किक रूप से सोचने के लिए बुद्धिमत्ता को समझ सकता है और उसके पास क्रोध और भावनाओं को नियंत्रित करने की इच्छा शक्ति है। गुस्सा, भले ही उचित हो, अल्पकालिक होना चाहिए। अहंकार से छुटकारा पाएं, विचारशील और सहानुभूतिपूर्ण बनें। दिनों और महीनों के लिए क्रोध, क्रोध और शत्रुता को जारी न रखें। अपने दिमाग को बीमार भावनाओं से रहित रखें। विनम्रता, करुणा और एक सहायक दृष्टिकोण का विकास करें। आपका यह दृष्टिकोण खुशी और मन की शांति प्रदान करेगा।
■ ईमानदार, सच्चे और विश्वसनीय बनें। एक जिम्मेदार तरीके से व्यवहार करें और जो आप कहते हैं उसका सम्मान करें। इस तरह आप आत्मसम्मान और बाद में खुशी अर्जित करेंगे।
■ जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं। जीवन को स्वीकार करें जैसे भी आए। समस्याओं और जिम्मेदारियों से दूर न भागें। समस्या का सामना करें और अपनी क्षमता और संसाधनों के साथ इसे हल करने का प्रयास करें। समस्या का एक सफल समाधान न केवल खुशी प्रदान करेगा, बल्कि पूर्णता की भावना भी प्रदान करेगा।
■ सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करें और हर दिन कम से कम एक अच्छा काम करके एक उद्देश्यपूर्ण जीवन जिएं।
इस प्रकार, उपर्युक्त युक्तियों का अभ्यास करने से व्यक्ति सुखी और शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर सकता है।
संकल्प का विकल्प क्यों ?
यदि हम अपने जीवन में सफल होना चाहते हैं तो एक संकल्प लेकर सदैव निम्न श्लोक को याद रखना चाहिए :-
उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम्। सोत्साहस्य हि लोकेषु नः किंचिदपि दुर्लभम्।। अर्थात-उत्साह ही बलवान होता है, उत्साह से बढ़कर दूसरा कोई बल नहीं है। उत्साही पुरुष के लिए संसार में कोई भी वस्तु दुर्लभ नहीं है।
आशा और उत्साह की शक्ति को जिसने नहीं जाना, वह जीवन संग्राम में सदा पराजित होता रहेगा। वास्तव में जीवन के प्रति आशा और उत्साह बढ़ा दृष्टिकोण हमारे अंदर अद्भुत ऊर्जा का संचार करता है।
यह उर्जा बड़ी से बड़ी बाधाओं पर विजय पाने का आत्म विश्वास देती है और हमें हर सीढ़ी पर उत्साह के सहारे आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है, संकल्प का विकल्प नहीं खोजती है।
हमें इस बात पर सदैव विश्वास रखना होगा कि आशा और आत्मविश्वास ही वे वस्तुएं हैं जो हमारे शक्तियों को जागृत करती हैं और हमारी उत्पादन शक्ति को दोगुना-तिगुना बढ़ा देती हैं। जो व्यक्ति जिस क्षेत्र में आशा और उत्साह के साथ परिश्रम करता है उसे क्षेत्र में सफलता अवश्य मिलेगी और जो लोग यह सोचते हैं कि अरे हमारे भाग्य में सफलता तो है ही नहीं, वे कभी अपने कार्य को सच्चे मन से शुरू नहीं कर पाते। उन्हें निराशा पहले इतना घेर लेती है कि उनका उत्साह मर जाता है। अगर मन में उत्साह मर जाता है तो फिर उसकी सारी सक्रियता भी ठंडी पड़ जाती हैं।
हमें बार-बार इस पर बल देना चाहिए कि "सफलता निर्भर करती है इच्छाशक्ति पर, आप की मनोदशाओं पर, जीवन का युद्ध हमेशा बलिष्ट और तेज दौड़ने वाले लोग ही नहीं जीतते वल्कि अभी या बाद में वही व्यक्ति जीतता है, जो यह सोचता है कि वह जीत सकता है।
इन बातों के साथ-साथ जब तक परिश्रम का साथ ना हो तो सब कुछ बेकार हो जाएगा, हम जिस लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं उसके अनुकूल हमें परिश्रम करना होगा क्योंकि हम सभी लोग सामान्य जन में प्रचलित निम्न कहावतों से परिचित हैं: जैसा दाम वैसा माल और जितना गुण डालोगे उतना मीठा होगा आदि।
यही नियम लक्ष्य प्राप्ति के संदर्भ में भी लागू होता है- अर्थात हम जितना ऊंची मंजिल पाने की इच्छा शक्ति रखते हैं उसी के अनुरूप साधना करने की मानसिकता बनानी होगी और एवरेस्ट पर्वत की चोटी जैसे ऊंचे लक्ष्य को फतह करने के लिए हमें एडमंड हिलेरी, हंट, शेरप्पा, तेंजिंग, बछेन्द्रीपाल, संतोष यादव और अरुणिमा सिन्हा आदि की भांति तैयारी और संघर्ष भी करना होगा।
हमें नेपोलियन की तरह आग पानी की परवाह किए बिना अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना होगा और अपने अंदर कर्तव्य की. भावना लिए अपने पथ पर चलते हुए सदैव याद रखना चाहिए कि आशावादिता मनुष्डे की सबसे बड़ी कुंजी है, जब अपने इच्छित को अपेक्षित मूल्य चुकाने का संकल्प लेकर सही दिशा में आशा, आत्मविश्वास, उत्साह, संयम और बुलंद हौसले के साथ अनुशासित रहकर नियमित परिश्रम करें और इतिहास रचने वाले महान पुरुषों से प्रेरणाशक्ति लेकर सच्चे मन से परिश्रम करें तो हमें अपने लक्ष्य के प्रति संकल्प के लिए किसी विकल्प की आवश्यकता नहीं होगी।
उत्साह जीवन का धर्म है, अनुत्साह मृत्यु का प्रतीक है। उत्साहवान मनुष्य ही सजीव कहलाने योग्य हैं, उत्साहवान मनुष्य सदैव आशावादी होता है, उसे सारा विश्व आगे बढ़ता हुआ दिखता दिखाई देता है। विजय, सफलता और कल्याण सदैव उनकी आंखों में नाचा करते हैं जबकि उत्साहहीन व्यक्ति को सदैव पराजय, असफलता व अशांति ही दिखाई देती है।
हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि :-
जिंदगी है तो ख्वाब है, ख्वाब है तो मंज़िलें हैं। मंजिलें हैं तो रास्ते हैं, रास्ते हैं तो मुश्किलें, हैं।
मुश्किलें हैं तो हौसले हैं, हौसले हैं तो विश्वास है। विश्वास है तो उत्साह है, उत्साह है तो सफलता है॥
विदर्भ कुमार ✍️
ए-305 ओ.सी.आर. बिल्डिंग,
विधानसभा मार्ग, लखनऊ
मो0 : 9415508695


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