प्रवासी भारतीय दिवस : विश्व पटल पर भारत की पहचान के सशक्त प्रहरी


प्रवासी भारतीय दिवस हर वर्ष 9 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन उन करोड़ों भारतीयों को सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने विदेशों में रहते हुए भी अपनी मेहनत, प्रतिभा और संस्कारों से न केवल भारत का नाम रोशन किया, बल्कि विश्व के अनेक देशों के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि भौगोलिक सीमाएँ चाहे बदल जाएँ, परंतु भारतीयता की भावना हर प्रवासी के हृदय में सदा जीवित रहती है।

प्रवासी भारतीय दिवस की तिथि विशेष महत्व रखती है, क्योंकि 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। उन्होंने विदेश में रहते हुए सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों के माध्यम से जो संघर्ष किया, वह प्रवासी भारतीयों की शक्ति और संकल्प का ऐतिहासिक उदाहरण है। इसी प्रेरणा से भारत सरकार ने वर्ष 2003 से इस दिवस को औपचारिक रूप से मनाने की शुरुआत की।

आज दुनिया के लगभग हर कोने में भारतीय समुदाय अपनी पहचान बना चुका है। चाहे वह अमेरिका की आईटी इंडस्ट्री हो, खाड़ी देशों का निर्माण क्षेत्र, यूरोप की शिक्षा व्यवस्था या अफ्रीका का व्यापार जगत—हर जगह प्रवासी भारतीय अपनी मेहनत और ईमानदारी से सम्मान अर्जित कर रहे हैं। वे न केवल अपने परिवारों का भविष्य संवारते हैं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करते हैं। विदेशों से आने वाली रेमिटेंस भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है, जो करोड़ों परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में सहायक है।

प्रवासी भारतीय केवल आर्थिक योगदान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भारत की सांस्कृतिक पहचान के भी संवाहक हैं। विदेशों में भारतीय त्योहारों का आयोजन, योग और आयुर्वेद का प्रचार, हिंदी और भारतीय भाषाओं का संरक्षण—ये सभी कार्य प्रवासी भारतीयों द्वारा ही संभव हो पाए हैं। वे नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का प्रयास करते हैं, ताकि आधुनिकता की दौड़ में भारतीय संस्कृति की सुगंध बनी रहे।

आज के वैश्विक परिदृश्य में प्रवासी भारतीय भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। जब किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बात होती है, तो प्रवासी भारतीय अपने प्रभाव और संपर्कों के माध्यम से भारत की छवि को मजबूत करते हैं। विज्ञान, तकनीक, चिकित्सा, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियाँ यह साबित करती हैं कि भारतीय प्रतिभा विश्व स्तर पर किसी से कम नहीं है।

प्रवासी भारतीय दिवस का उद्देश्य केवल सम्मान समारोह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत और प्रवासी समुदाय के बीच सेतु को और मजबूत करने का प्रयास भी है। इस अवसर पर होने वाले सम्मेलनों, संवादों और नीतिगत चर्चाओं से यह संदेश जाता है कि भारत अपने प्रवासी नागरिकों को केवल विदेशों में बसे लोग नहीं, बल्कि अपने राष्ट्र का अभिन्न अंग मानता है। सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाएँ—जैसे प्रवासी भारतीय सहायता कोष, ओसीआई कार्ड और निवेश प्रोत्साहन कार्यक्रम—इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

आज जब भारत ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ की ओर अग्रसर है, तब प्रवासी भारतीयों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। वे अपने अनुभव, तकनीकी ज्ञान और वैश्विक दृष्टिकोण से देश के विकास में नई ऊर्जा भर सकते हैं। स्टार्टअप संस्कृति, नवाचार और वैश्विक निवेश में उनकी भागीदारी भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थान दिलाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।

अंततः कहा जा सकता है कि प्रवासी भारतीय दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक भावनात्मक पुल है, जो भारत को अपने उन बेटों और बेटियों से जोड़ता है, जो दूर रहकर भी दिल से भारत के बेहद करीब हैं। यह दिन हमें गर्व से यह कहने का अवसर देता है कि भारतीयता केवल भूगोल नहीं, बल्कि एक भावना है—जो जहाँ भी जाती है, वहाँ अपनी पहचान खुद बना लेती है। प्रवासी भारतीयों के योगदान को नमन करते हुए यही कामना है कि वे विश्व पटल पर भारत की गरिमा को यूँ ही ऊँचाइयों तक पहुँचाते रहें।


परिवर्तन चक्र समाचार सेवा ✍️ 



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