अब गांव के लोगों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना आसान, आरटीओ में नहीं देना होगा टेस्ट


लखनऊ। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अब परेशानी नहीं उठानी होगी। ऐसे लोग अब गांव में ही ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों (Driving Training School) के प्रशिक्षण (Training) ले सकेंगे, जिसके बाद उन्हें आरटीओ में लाइसेंस बनवाने के लिए टेस्ट नहीं देना होगा। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की समस्या को देखते हुए केंद्रीय मोटर यान अधिनियम (Central Motor Vehicle Act) में इस विषय पर रूपरेखा तैयार की गई है। इसके लिए 29 जनवरी को जारी शासनादेश में 28 फरवरी तक आपत्तियां मांगी गई हैं। आपत्तियों के निस्तारण के बाद ड्राइविंग स्कूल खुल सकेंगे। इससे ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) बनवाने की प्रक्रिया सरल होगी।

दरअसल वाहनों को चलाने के लिए आरटीओ (RTO) लाइसेंस जारी करता है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया है। जिसमें लोगों को काफी समय तक इंतजार करना होता है। जिसमें प्रथम चरण में लर्निंग लाइसेंस के लिए टेस्ट के बाद स्थाई (Permanent Driving License) लाइसेंस के लिए आटोमैटिक ट्रैक पर टेस्ट लिया जाता है। इस लंबी प्रक्रिया को देखते हुए ग्रामीणांचलों में ड्राइविंग स्कूल खोलने का फैसला लिया गया है।

संभागीय परिवहन के अफसरों ने बताया कि एक तरह से डीएल बनाने की प्रक्रिया को सुगम किया गया है। इसके अलावा इस क्षेत्र में भी निजी लोगों की सहभागिता होगी तो प्रक्रिया सरल हो जाएगी। निजी ड्राइविंग स्कूल खोलने के लिए लंबे समय से मांग हो रही थी। इससे ही केंद्रीय एमवी एक्ट (CMVA) में संशोधन के लिए खाका तैयार हुआ है। हालांकि वर्तमान में प्रदेश में कौशल विकास मिशन के तहत महिला-पुरुषों को ड्राइविंग प्रशिक्षण दिया जा रहा है।



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