अपराध बेलगाम! अब जज की कार पर दिनदहाड़े हमला


मामले की गंभीरता को देखते हुए सेंट्रल रेंज के आईजी ने नालंदा के एडिशनल एसपी से 24 घंटे के अंदर जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है।

बिहार में अपराध को रोकने में पुलिस लगातार नाकाम साबित हो रही है। इसके चलते बदमाशों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं और वे अब न्याय का फैसला करने वाले अफसरों को भी नहीं छोड़ रहे। ताजा मामला राज्य के बिहार शरीफ का है। यहां हिलसा व्यवहार न्यायालय के जज की कार पर गुरुवार शाम बाइक सवार तीन बदमाशों ने हमला कर दिया। अपराधियों ने जज की कार पर फायरिंग तक की। हालांकि, ड्राइवर की सूझ-बूझ से अपराधियों को भागने के लिए मजबूर होना पड़ा।

बताया गया है कि यह हमला उस समय हुआ, जब एडीजे वन जय किशोर दुबे कोर्ट से आवास की तरफ लौट रहे थे। इस दौरान सूर्य मंदिर तालाब के पास कुछ बदमाश बाइक से आए और कार में टक्कर मार दी। कार चालक ने इसके बाद बाइक सवारों से ठीक से गाड़ी चलाने के लिए कहा। हालांकि, इसी बात पर बाइक सवार उलझ गए और रोड़ेबाजी कर उन्होंने कार का शीशा तोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने हथियार निकाले और फायरिंग शुरू कर दी।

कार चालक ने इसके बाद हिम्मत दिखाते हुए गाड़ी भगाई और पीछा कर रहे बाइकसवारों से आगे निकलते हुए कार पुलिस स्टेशन के सामने खड़ी कर दी। इस घटना की सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुंची और कार को सुरक्षित किया। पुलिस को मौके पर एक कारतूस का खोखा भी मिला। माना जा रहा है कि बदमाश पूरी तैयारी के साथ जज पर हमले के लिए आए थे।

सेंट्रल रेंज के आईजी ने लिया संज्ञान: एडीजे पर हुए इस हमले की कोशिश का सेंट्रल रेंज के आईजी संजय सिंह ने भी संज्ञान लिया है। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए नालंदा के एडिशनल एसपी से 24 घंटे के अंदर जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि जांच के आधार पर दोषियों की पहचान की कोशिश जारी है। उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बिहार में एनडीए काल में भी नहीं घटा अपराध: NCRB के प्रकाशित आंकड़ों की मानें तो बिहार आईपीसी की विभिन्न धाराओं में दर्ज कुल आपराधिक मामलों में चौथे स्थान पर है। एनसीआरबी ने साल 2018 तक का डेटा जारी किया और 2019 का डेटा अभी जारी नहीं किया गया है। स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की वेबसाइट पर उपलब्ध 2001 से 2019 के डेटा से पता चलता है कि राज्य में अपराध के मामलों में हर साल बढ़ोतरी हुई है। द वायर की एक खबर के मुताबिक बिहार में साल 2001 में 95,942 संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए जो 2004 में बढ़कर 1,15,216 हो गए। हालांकि 2005 में इसमें दस हजार की कमी आई थी।




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