किन राशियों पर शनिदेव रहते हैं मेहरबान और किन्हें रहना चाहिए सावधान? जानें क्या है मान्यता...

कौन-सी राशियों को माना जाता हैं शनिग्रह के मित्र और शत्रु, जानिए क्या आपकी राशि भी है शामिल.... 

Shani Grah Ka Prabhav : मेष राशि का स्वामी ग्रह मंगल है इसलिए इस राशि के जातकों को शनि ग्रह के प्रतिकूल प्रभावों को सहना पड़ता है।

Shani Mitra Aur Shatru Grah : ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्याय प्रिय देवता के रूप में पूजा जाता है। विद्वानों के अनुसार शनि ग्रह के देवता शनिदेव ही हैं। कहते हैं कि इस ग्रह के अनुसार मनुष्यों को वैसा ही फल प्राप्त होता है, जिस प्रकार के उनके कर्म होते हैं। इसलिए साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि ग्रह के नकारात्मक प्रभाव सह रहे लोगों को यह सलाह दी जाती है कि वह अपने कर्मों को अच्छा बनाए रखें। क्योंकि शनि ग्रह के दुष्प्रभावों से बचने के लिए यह सबसे आसान और कारगर उपाय है।

सभी ग्रहों के मित्र और शत्रु ग्रह होते हैं, इसी के मुताबिक यह तय किया जाता है कि किन राशियों पर शनिदेव अपनी कृपा बरसाते हैं और किन राशियों के जातकों को इसका प्रतिकूल प्रभाव झेलना पड़ता है। कहते हैं कि किसी ग्रह के प्रतिकूल प्रभावों के मिलने पर सतर्क हो जाना चाहिए। साथ ही यह प्रयास करना चाहिए कि उसके उपाय नियमित रूप से कर दुष्प्रभावों से बचा जा सके।

ज्योतिष के विद्वानों की मानें तो शनि ग्रह के मित्र ग्रह बुध और शुक्र हैं, जबकि सूर्य, चंद्रमा और मंगल आदि को शनि ग्रह का शत्रु ग्रह माना जाता है। जानकारों का मानना है कि बृहस्पति ग्रह शनि ग्रह के साथ समभाव रहते हैं। शनि ग्रह राशिचक्र की दो राशियों यानी मकर और कुंभ का मालिक हैं। इन दोनों राशियों के जातक शनिदेव के अनुकूल प्रभावों से ज्यादा प्रभावित होते हैं, जबकि शनि ग्रह की उच्च राशि तुला है और नीच राशि मेष है।

राशियों के अनुसार बताया जाए तो मेष राशि का स्वामी ग्रह मंगल है इसलिए इस राशि के जातकों को शनि ग्रह के प्रतिकूल प्रभावों को सहना पड़ता है। वृष राशि के मुख्य ग्रह शुक्र देव हैं, इसलिए शनि इन्हें शुभ फल प्रदान करते हैं। जबकि मिथुन राशि के स्वामी बुध ग्रह हैं, इसलिए मिथुन राशि वालों को शनिदेव का प्रकोप सहना पड़ता है।

कर्क राशि के स्वामी ग्रह चंद्रमा, सिंह राशि के सूर्य और कन्या राशि के बुध ग्रह होने की वजह से इस राशि के जातकों को शनिदेव से नकारात्मक प्रभाव मिलते हैं। जबकि तुला राशि शनिदेव की उच्च राशि होने की वजह से शनिदेव की कृपा प्राप्त करने वाली राशि है।

वृश्चिक राशि के जातकों के स्वामी देवता मंगल है, इसलिए इन्हें प्रतिकूल प्रभाव मिलते हैं, जबकि धनु और मीन राशि वालों के स्वामी ग्रह गुरु हैं, इसलिए इन राशि के जातकों के साथ शनि समभाव रहते हैं। मकर और कुंभ राशियों के स्वामी देवता स्वयं शनिदेव हैं, इसलिए सामान्य तौर पर यह कहा जाता है कि इन राशियों के जातकों को इसकी वजह से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।




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