सिर्फ कलाई पर राखी नहीं, जीवनभर साथ निभाने का संकल्प है रक्षाबंधन
रक्षाबंधन केवल कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच अटूट प्रेम, विश्वास, स्नेह और जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाने के संकल्प का उत्सव है। श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पावन पर्व भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों की सुंदर अभिव्यक्ति है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर प्रेम और विश्वास का प्रतीक राखी बांधती हैं, उनके सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती हैं, वहीं भाई बहनों की रक्षा और हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े रहने का संकल्प लेते हैं।
रक्षाबंधन का संबंध केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज में रिश्तों की गरिमा, जिम्मेदारी और पारस्परिक सम्मान का संदेश भी देता है। राखी का धागा भले ही देखने में बेहद साधारण हो, लेकिन इसमें भावनाओं की वह मजबूती होती है जो जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में रिश्तों को जोड़े रखती है। बचपन की नोंक-झोंक, छोटी-छोटी बातों पर रूठना-मनाना और साथ बिताए अनगिनत पल समय के साथ भले ही पीछे छूट जाएं, लेकिन भाई-बहन का रिश्ता उम्र के हर पड़ाव पर अपनी मिठास बनाए रखता है।
भारतीय परंपरा में रक्षाबंधन को लेकर अनेक ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी कथा भाई-बहन जैसे पवित्र स्नेह और रक्षा की भावना को दर्शाती है। वहीं इतिहास में भी राखी को सामाजिक और मानवीय संबंधों को मजबूत करने वाले प्रतीक के रूप में देखा गया है। यही कारण है कि रक्षाबंधन सदियों से भारतीय जनमानस की भावनाओं से जुड़ा हुआ पर्व बना हुआ है।
समय के साथ रक्षाबंधन मनाने के तौर-तरीकों में बदलाव जरूर आया है, लेकिन इसकी मूल भावना आज भी वही है। दूर रह रहे भाई-बहन अब वीडियो कॉल और ऑनलाइन माध्यमों से एक-दूसरे से जुड़ते हैं। डाक और ऑनलाइन माध्यमों से राखियां भेजी जाती हैं, लेकिन राखी के धागे में बंधा अपनापन और प्रेम आज भी उतना ही गहरा है। विदेशों या दूसरे शहरों में रहने वाले भाई-बहनों के लिए यह पर्व अपने घर, परिवार और बचपन की यादों से जुड़ने का अवसर बन जाता है।
रक्षाबंधन हमें यह भी सिखाता है कि सुरक्षा केवल किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है। आज भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेते हैं तो बहन भी भाई के सुख-दुःख में मजबूती से उसके साथ खड़ी रहती है। बदलते सामाजिक परिवेश में रक्षाबंधन को समानता, सम्मान और एक-दूसरे के अधिकारों की रक्षा के संकल्प के रूप में भी देखा जाना चाहिए। भाई-बहन का रिश्ता तभी और मजबूत होगा, जब दोनों एक-दूसरे के सपनों, स्वतंत्रता और निर्णयों का सम्मान करेंगे।
यह पर्व परिवार को एक साथ लाने का भी महत्वपूर्ण अवसर है। घरों में उत्सव का माहौल रहता है। बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं, आरती उतारती हैं और मिठाई खिलाती हैं। भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और जीवन के हर सुख-दुःख में साथ निभाने का वचन देते हैं। इस अवसर पर घर-परिवार में बनने वाले पारंपरिक पकवान और मिठाइयां पर्व की खुशियों को और बढ़ा देती हैं।
आज जब भागदौड़ भरी जिंदगी में रिश्तों के लिए समय कम होता जा रहा है, ऐसे में रक्षाबंधन जैसे पर्व हमें अपनी जड़ों और अपनों से जोड़ने का काम करते हैं। यह त्योहार याद दिलाता है कि जीवन में धन-दौलत और भौतिक सुख-सुविधाओं से कहीं अधिक महत्वपूर्ण वे रिश्ते हैं, जो कठिन समय में हमारे साथ खड़े रहते हैं। राखी का धागा इसी विश्वास का प्रतीक है।
रक्षाबंधन का संदेश केवल इतना नहीं कि भाई बहन की रक्षा करे, बल्कि इसका व्यापक अर्थ है—एक-दूसरे के सम्मान, अधिकार, सपनों और खुशियों की रक्षा करना। यही भावना इस पर्व को और अधिक सार्थक बनाती है। आइए, इस रक्षाबंधन पर हम केवल राखी बांधने और उपहार देने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने रिश्तों में प्रेम, विश्वास, सम्मान और सहयोग को और मजबूत करने का संकल्प लें।
रक्षाबंधन का यह पावन पर्व सभी भाई-बहनों के जीवन में प्रेम, खुशियां, समृद्धि और अपनापन लेकर आए। राखी का यह पवित्र धागा हर रिश्ते को मजबूत करे और परिवारों में स्नेह एवं सद्भाव की मिठास हमेशा बनी रहे।
मोहनीश गुप्ता "मोनू" ✍️समाजसेवी, बलिया (उ.प्र.)


