👉28 फरवरी तक 12 ब्लॉकों में चलेगा आईडीए अभियान, दवा सेवन ही बचाव का एकमात्र उपाय

👉एक साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं व अत्यंत गंभीर मरीजों के अलावा सभी लोग करें फाइलेरियारोधी दवा का सेवन 

बलिया, 09 फरवरी 2026। प्रदेश फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। इसी क्रम में जनपद बलिया के 12 ब्लॉकों को फाइलेरिया मुक्त करने के लक्ष्य के साथ मंगलवार से सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान की शुरुआत की जा रही है। अभियान के अंतर्गत इन ब्लॉकों के 22 लाख 64 हजार पात्र लोगों को 28 फरवरी 2026 तक फाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाई जाएंगी। फाइलेरिया जैसी गंभीर, दीर्घकालिक एवं दिव्यांगता उत्पन्न करने वाली बीमारी से बचाव का दवा सेवन ही एकमात्र प्रभावी उपाय है।

अभियान के दौरान आईवरमेक्टिन, डीईसी और एल्बेंडाजोल दवाएं स्वास्थ्यकर्मियों की प्रत्यक्ष निगरानी में खिलाई जाएंगी।

यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय यादव ने सोमवार को सीएमओ कार्यालय में आयोजित मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 51 जिलों के 782 ब्लॉकों में फैली यह बीमारी अब लगातार सिमट रही है। इस बार आईडीए अभियान केवल 21 जिलों के 64 ब्लॉकों में ही चलाया जा रहा है, जिनमें बलिया जनपद के बलिया अर्बन, रसड़ा, दुबहड़, सोनवानी, रेवती, रतसड़, वयना, बैरिया, मुरलीछपरा, बासडीह, बेरुआरबारी और चिलकहर ब्लॉक शामिल हैं।

डॉ. विजय यादव ने कहा कि जिले से फाइलेरिया को पूरी तरह समाप्त करने के लिए जरूरी है कि एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं अत्यंत गंभीर रोगियों को छोड़कर सभी पात्र लोग इसे अपना सामाजिक कर्तव्य समझते हुए दवा का सेवन करें। संवेदीकरण के उपरांत उपस्थित सभी पत्रकारों ने स्वयं दवा का सेवन कर जन-जागरूकता का संदेश दिया।

सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में बताया गया कि आईडीए अभियान पाँच स्तम्भीय रणनीति पर आधारित है। इसमें डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुशंसित दवाओं का प्रत्यक्ष निगरानी में सेवन, रुग्णता प्रबंधन एवं रोकथाम, वेक्टर नियंत्रण, विभागीय समन्वय तथा जन-आंदोलन के रूप में समुदाय की भागीदारी शामिल है। इसके साथ ही डिजिटल टूल्स के माध्यम से रियल-टाइम रिपोर्टिंग एवं नए डायग्नोस्टिक उपकरणों का भी उपयोग किया जा रहा है। अभियान में शिक्षा विभाग, पंचायती राज, यूपीएसआरएलएम सहित कई विभागों का सहयोग रहेगा।

संवेदीकरण कार्यशाला में समुदाय स्तर पर सीएचओ-पीएसपी प्लेटफार्म के माध्यम से जन-जागरूकता गतिविधियां संचालित करने वाले अपायल आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्लेटफार्म के सदस्य एवं फाइलेरिया मरीज शरफुद्दीन ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उन्हें दस वर्ष पूर्व हाथीपांव की बीमारी हो गई थी। कई उपचारों के बावजूद लाभ नहीं मिला। अब उनका एकमात्र लक्ष्य है कि कोई और इस बीमारी का शिकार न हो, इसके लिए वे निरंतर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।

वेक्टर जनित रोगों के नोडल अधिकारी डॉ. अभिषेक मिश्रा ने बताया कि फाइलेरिया (हाथीपांव) मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला संक्रामक रोग है, जो गंभीर दिव्यांगता का कारण बनता है। पहले यह बीमारी जिले के 18 ब्लॉकों में फैली थी, लेकिन उच्च दवा कवरेज के चलते अब छह ब्लॉकों में इसका प्रसार काफी कम हो गया है। इसी कारण इस वर्ष 12 ब्लॉकों में आईडीए अभियान संचालित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर दवा खिलाएंगी। यदि किसी कारणवश घर पर दवा सेवन संभव न हो, तो आशा कार्यकर्ता के घर को डिपो के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां जाकर दवा का सेवन किया जा सकता है। इस दौरान उन्होंने रुग्णता प्रबंधन एवं रोकथाम किट (एमएमडीपी) की भी जानकारी दी।

डॉ. अभिषेक मिश्रा ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए कम से कम 90 प्रतिशत पात्र आबादी का दवा सेवन आवश्यक है, क्योंकि अधिकांश संक्रमित व्यक्ति लक्षणहीन वाहक होते हैं और अनजाने में संक्रमण फैलाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि “कोई भी पात्र व्यक्ति न छूटे” अभियान का मूल संदेश है। दवा खाली पेट नहीं लेनी है और स्वास्थ्यकर्मी के सामने ही सेवन करना अनिवार्य है।

दवा सेवन के बाद चक्कर आना या जी मिचलाना जैसे हल्के लक्षण शुभ संकेत हैं, घबराने की आवश्यकता नहीं है। ये लक्षण स्वतः ठीक हो जाते हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए ब्लॉक स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीमें गठित की गई हैं।

कार्यशाला को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. मंजीत सिंह चौधरी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. पदमावती गौतम, डॉ. योगेन्द्र दास, डिप्टी डीआईओ डॉ. शशि प्रकाश, जिला मलेरिया अधिकारी राजीव त्रिपाठी, तथा पार्टनर संस्थाएं पाथ, पीसीआई और सीफार के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

फैक्ट फाइल :

जनपद में फाइलेरिया के कुल मरीज : 4263

हाइड्रोसिल के मरीज : 524

दवा सेवन कराने वाली कुल टीमें : 1980

निगरानी के लिए तैनात सुपरवाइजर : 330